भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे भरोसेमंद और तेज माध्यम UPI बन चुका है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यापार और आम उपभोक्ता तक, सभी रोजाना UPI के जरिए लेनदेन कर रहे हैं। इसी बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए 22 जनवरी 2026 से UPI सिस्टम में कुछ नए नियम लागू किए गए हैं। ये बदलाव National Payments Corporation of India द्वारा किए गए हैं, जिनका मकसद पेमेंट सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित, तेज और स्थिर बनाना है, ताकि करोड़ों यूजर्स को बिना रुकावट बेहतर सेवा मिल सके।
UPI नियमों में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी
पिछले कुछ वर्षों में UPI ट्रांजैक्शन में रिकॉर्ड तेजी देखी गई है। हर दिन करोड़ों लेनदेन होने लगे हैं, जिससे बैंक सर्वर और नेटवर्क पर भारी दबाव पड़ने लगा था। बार-बार बैलेंस चेक, अकाउंट लिस्ट देखने और ऑटोपे रिक्वेस्ट के कारण कई बार ट्रांजैक्शन फेल या स्लो हो जाते थे। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए 22 जनवरी 2026 से नए नियम लागू किए गए हैं।
बैलेंस चेक और अकाउंट लिस्ट पर नई सीमा
अब एक UPI ऐप से दिन भर में केवल 50 बार ही बैंक बैलेंस चेक किया जा सकेगा। अगर किसी यूजर के पास एक से ज्यादा UPI ऐप हैं, तो यह सीमा हर ऐप पर अलग-अलग लागू होगी। इसी तरह लिंक किए गए बैंक अकाउंट्स की लिस्ट देखने की सीमा भी तय कर दी गई है। एक ऐप से दिन में सिर्फ 25 बार ही अकाउंट लिस्ट देखी जा सकेगी। इससे सिस्टम पर अनावश्यक लोड कम होगा और पेमेंट ट्रांजैक्शन ज्यादा स्मूद होंगे।
ऑटोपे और सब्सक्रिप्शन से जुड़े बदलाव
UPI ऑटोपे सुविधा, जिसका इस्तेमाल EMI, मोबाइल बिल और सब्सक्रिप्शन के लिए होता है, अब नॉन-पीक टाइम में ही प्रोसेस होगी। इसके अलावा किसी भी ऑटोपे ट्रांजैक्शन को अधिकतम चार बार ही ट्राई किया जाएगा। इससे फेल ट्रांजैक्शन कम होंगे और रिफंड से जुड़ी परेशानियां भी घटेंगी।
निष्क्रिय UPI ID पर नई व्यवस्था
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह नियम लागू किया गया है कि अगर कोई UPI ID लगातार 12 महीनों तक इस्तेमाल नहीं की गई है, तो वह अपने आप डिएक्टिवेट हो जाएगी। इससे मोबाइल नंबर दोबारा जारी होने पर होने वाली धोखाधड़ी रोकी जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर यूजर वेरिफिकेशन के जरिए UPI ID फिर से एक्टिव कर सकता है।
तेज ट्रांजैक्शन और नई क्रेडिट सुविधा
22 जनवरी 2026 से UPI ट्रांजैक्शन का रिस्पॉन्स टाइम 30 सेकंड से घटाकर 10 सेकंड कर दिया गया है, जिससे पेमेंट पहले से कहीं ज्यादा तेज होंगे। इसके साथ ही प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लाइन या ओवरड्राफ्ट अकाउंट से भी UPI पेमेंट की सुविधा मिलेगी, जिससे जरूरत के समय फंड मैनेजमेंट आसान होगा।
निष्कर्ष
22 जनवरी 2026 से लागू नए UPI नियम यूजर्स को सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए लाए गए हैं। थोड़ी सी आदत बदलने से UPI का अनुभव पहले से कहीं बेहतर होगा।
Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। UPI से जुड़े नियम और सुविधाएं समय-समय पर बदल सकती हैं। किसी भी लेनदेन से पहले अपने बैंक या UPI ऐप की आधिकारिक जानकारी अवश्य जांचें। लेखक किसी भी वित्तीय निर्णय या नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं है।





